Best Hindi Poems By Anuradha Rani | दर्द की किताब |

-:दर्द की किताब :-

 

हाल-ए-दिल बयान करने के लिए मैं जब भी कुछ लिखती हूँ
क़लम और स्याही साथ रखती हूँ
हुनर नहीं है इतना की दुनिया को दिखा पाऊं
मैं तो बस अपने दर्द की किताब लिखती हूँ
ना ज़ुस्तज़ू है कुछ पाने की ना खोने का डर है
उम्मीदों से ही सजा मेरा एक घर है
ना कुर्बत है किसी से ना बेरुखी ही रखती हूँ
मैं तो बस अपने दर्द की किताब लिखती हूँ
ना सफ़र है मेरा ना मंजिल का है पता
भूल करू कोई या कर दू कोई खता
मैं कहां किसी को समझा पाती हूँ
मैं तो बस अपने दर्द की किताब लिखती हूँ
शौक़ नहीं रुपयों का ना चाह है दौलत की
ताउम्र लिखूं बस यही एक हसरत है
मेरे लिए तो कोरा कागज़ ही काफ़ी है
क़लम और स्याही ही मेरे साथी हैं
पूछे कोई वज़ह अगर मैं कहां बता पाती हूँ
मैं तो बस अपने दर्द की किताब लिखती हूँ

_अनुराधा रानी

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