हिंदी कविताएं

हिंदी कविताएं 2020 | Best Hindi Poems | Poem of the month |

हिंदी कविताएं 2020 | Best Hindi Poems | Poem of the month |

आज पूरा विश्व महामारी से त्रस्त है। दुनिया के वो देश जो कल तक महाशक्ति कहे जाते थे, आज एक अदृश्य योद्धा के सामने किंकर्तव्यविमूढ़ नजर आते हैं। इसी विचार को शब्दों में पिरोने का प्रयास किया जा रहा है।

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-:- यह समर है -:-

यह समर है,

शक्ति पूरे विश्व की

है सामने अदृश्य योद्धा

कर दिया असहाय सबको

सबने माना उसका लोहा

हो रहे लाखों मनुज,

दिन प्रतिदिन कॉल कवलित

आज दुनिया की सभी

समर्थ शक्तियां है विचलित

आज एटम बम और मिसाइलें

नाकाम लगती।

आज बंमवर्षक और पनडुब्बियों

बेकाम लगती।

यह कभी सोचा नहीं था

एक दिन ऐसा भी होगा।

पास आने से बचेंगे

दूर रहना ही जंचेगा।

मानवीय गलती है कोई या कि

प्रकृति का है कोप,

होना क्यों जब हो रहा

संवेदना का लोप।

जो भी है अब मिलके

ही लड़ना पड़ेगा

जाति मजहब वर्ग से उठकर ऊपर

सामने इस शत्रु के अड़ना पड़ेगा।

यदि न चेते डूबेंगे ऐसी लहर है।

यह समर है।

-:- जिंदगी -:-

कभी धूप में कभी छाँव में

छाले पड़े कभी पांव में

आगे ही बढ़ना है जिन्दगी संघर्ष करना जिंदगी ।

चलते रहो रुकना नहीं

चलने का नाम है जिन्दगी ।।

कभी खुशियों का इक शोर है

कभी गम काआता दौर है

विचलित न हो पथ पर रहो

चंचल चपल है जिंदगी ।

चलते रहो रुकना नहीं

चलने का नाम है जिंदगी |।

कोई खास है कोई आम है

कोई समय आम के नाम है

इस आम ओ खास का फासला

है दूर करना जिन्दगी

चलते रहो रुकना नहीं

चलने का नाम है जिंदगी |

कभी एक लहर की तलाश थी

कभी लहर तेरे पास है

तो डाल नौका लहर में

आबाद कर लो जिंदगी

चलते रहो रुकना नहीं

चलने का नाम है जिंदगी |

हिंदी कविताएं 2020

-:- आमने सामने -:-

आइये बैठिये आमने सामने

सारे शिकवे गिले दूर हो जायेंगे |

वक्त है सारी तल्खी मिटा लीजिये

वरना फिर बाद में आप पछताएँगे |

इश्क में मैं अनाड़ी सही मानता

आप तो हमसे ज्यादा समझदार थीं |

मेरे हर भूल पर रोक सकतीं मुझे

ऐसा कर सकने की आप हक़दार थीं |

मुझे क्या पता मेरे अंदाज को

इतनी आसानी से ना समझ पाएंगे |

आइये बैठिये आमने सामने

सारे शिकवे गिले दूर हो जायेंगे |

आपकी भारी पलके बयाँ कर रहीं

दूर रहके कई रातें सोयी नहीं |

सुर्ख चेहरे की रंगत है फीकी पड़ी

लग रहा हमसे कम आप रोई नहीं |

जो हुआ सो हुआ सब भुला दीजिये

आइये रह में साथ हो जायेंगे |

आइये बैठिये आमने सामने

सारे शिकवे गिले दूर हो जायेंगे |

गर शिकायत है अब भी तो सुन लीजिये

जोड़ सकते नहीं फिर तोडा ही क्यों ?

दिल चुरा लेने से गर सकूं न मिला

जां भी लेते मुझे जिन्दा छोड़ा ही क्यों ?

प्रश्न इतने हैं जब सामने आयेंगे

उत्तरों के समय मौन हो जायेंगे |

आइये बैठिये आमने सामने

सारे शिकवे गिले दूर हो जायेंगे |

हिंदी कविताएं 2020

-:-  हसरत-ऐ- दिल  -:-

हसरतें दिल ही दिल में मचलती रहीं,

मेरे अरमा की अर्थी निकलती रही।

रहबरों ने की नियत रहजनी की जगह,

वक्त के साथ नीयत बदलती रही।

जंग और इश्क़ में सब है जायज सुनो,

ये बता करके वो जुर्म करती रही।

जिस्म और रूह पर पहले कब्जा किया,

फिर मेरे इश्क़ का मोल करती रही।

इस कदर हम फसे काल के जाल में,

हर कदम जिंदगी सबसे डरती रही।

-:- हवाओं में खुशबू -:-

इन हवाओं में खुशबू बिखेरे हुए

आप आये थे लेकिन किधर चल दिये |

ना घरौंदा बना ना बसेरे हुए

आप आये थे लेकिन किधर चल दिये |

आप का आगमन एक संयोग है

या विधाता रचित कोई शुभ योग है |

जो भी हो अर्थ जीवन का पा ही गया

पर तुझे मिल न पाया ये दुर्योग है ||

राग छम-छम का सबको सुनाते हुए

आप थे लेकिन किधर चल दिये |

मेरे जमते रुधिर को तपिश मिल गयी

नाव जीवन की ठहरी थी वो हिल गयी |

कल्पना को मेरे जैसे पर लग गए

मन की मुरझाई थी वो कली खिल गयी |

तन पे धानी सी चुन्दर लपेटे हुए

आप आये थे लेकिन किधर चल दिये।

आपकी एक बाकी नज़र का असर

मैं मगन इतना मुझको नही कुछ खबर

प्रिय मिलन की मधुर चाह मन में लिए

एक धुन में रहूँ सबसे हो बेखबर

प्रेम माधुर्य को तुम बढाते हुए

आप भी जाओ न जाना कभी तुम प्रिये ।

इन हवाओं में खुशबू बिखेरे हुए |

आप आये थे लेकिन किधर चल दिये ||

-:- चले आइए -:-

शाम ढलने से पहले चले आइए।

सांस थमने से पहले चले आइए।।

ये महफिल सजी आप ही के लिए

आना तो था यहां पर कहां चल दिए,

अपनी सूरत पर इतना न इतराइये।। शाम ढलने से…

आप ठहरे जिधर यह मुझे है खबर।

रहजनों का नगर आगे मुश्किल सफर।

मशविरे पर मेरे गौर फरमाइए।। शाम ढलने से…

दिन है जीवन के कम फिर भी पाले भरम,

काम करना था क्या और किए क्या करम,,

सोचकर अब तो थोड़ा सा शरमाइये है। शाम ढलने से…

देर तब भी नहीं देर अब भी नहीं

बंदगी के लिए हर समय है सही

राह पर आइए और संभल जाइए।

शाम ढलने से पहले चले आइए

सांस थमने से पहले चले आइए।।

हिंदी कविताएं 2020

-:- धुआं धुआं -:-

जमीं पटी हुई है लाशों से

दिख रहा है धुआं धुआं शायद।

ऐसा ए खौफनाक मंज़र है

खौफ में है ये आसमां शायद।

समझ रहे थे जो सारे जहां को मुट्ठी में

उनका टूटा है अब गुमां शायद।

बच कर अब किस तरफ से निकलोगे

पहरे में है सभी मुकां शायद।

अब तो केवल खुदा को याद करो

क्योंकि कोई न अब रहनुमां शायद।

_Sanjay Kumar Tripathi

 

 

 

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