hindi kavita 2020

Hindi kavita 2020 | Best Hindi poem by Ankit Soni

Hindi kavita 2020 | Best Hindi poem by Ankit Soni

*बेटी से भेद, बेटी से भाव*

आज मैं आपसे जो करूं, वो बात है कुछ है कुछ ऐसी,

लड़कियों के लिए विशेष है, नहीं कोई ऐसी या वैसी!

निवेदन करता हूं आपसे, पढ़ना ध्यान लगाकर,

गलत हूं या सही बताना, मन के विचार रखकर!!

अपनी पहली श्वास से उसे, है बतलाया जाता,

तू लड़की है लड़का नहीं, नहीं तुझको ज्यादा आता!

बल में हो या बुद्धि में, उसके भाई से कम आंकने वाले,

कमजोरी की पहली सीढ़ी, होते हैं उसके घरवाले!!

उसे बार-बार बतलाते हैं, तू लड़की है एक लड़की,

ये मत कर तू वो मत कर, नहीं तू अच्छी लगती!

आगे जाके जब वो, हो जाती है बड़ी,

डर लगता है मां-बाप को, उनकी चिंता भी है बढ़ी!!

तू यहां न जा तू वहां न जा, तुझे देखें कई लोग,

डर लगता है हरपल कि, कुछ कर ना दें वे लोग!

इसी डर से अपने कि, वो हो न जाए जुदा,

बीस-बाईस की हुई नहीं, कि कर देते हैं विदा!!

अब अंकित पाठक से, है कुछ ऐसा कहता,

काश! उसे माना होता, जैसे वो है कोई बेटा!

बचपन से ही याद दिलाते, तू मजबूत है मजबूत,

न लोगों की समस्या होती, और न ही भय का भूत!!

यदि देश से खत्म करना है, अपराध और बलात्कार,

अपने बेटे को भी देने होंगे, संस्कृति और संस्कार!

बेटी को याद दिलाओ, कि तू है किरण वेदी

अपने भाई के ही समान है, नहीं है कोई भेदी!!

केवल कविता पढ़ने से, नहीं है कुछ भी होता,

अपने व्यवहार में लाना होगा, बेटी सा न कोई बेटा!

आपने मुझे पढ़ा, प्रकट करता हूं आभार,

निवेदन है ये आपसे, आप भी दें विचार!!

Hindi kavita 2020

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#मेरा_परिवार_मेरा_संसार

पाठक से है निवेदन, कृपया दें क्षण कुछेक चंद,

रचना है मेरी कुछ ऐसी, कि पढ़कर आए आनंद!

बताने वाला हूं जो मैं आपको, वे पेश हैं पंक्ति चार,

ये है मेरा परिवार, और यही है मेरा संसार!!

पिता हैं जो मेरे, कैलाश है जिनका नाम,

निस्वार्थ प्रेम है जिनका मुझपर, नहीं लेते कोई दाम!

बनाते हैं मुझको मजबूत, और देते हरपल संस्कार,

ये है मेरा परिवार, और यही है मेरा संसार!!

स्वभाव है उनका बिल्कुल, एक नारियल के फल जैसा,

ऊपर से एकदम कठोर, और अंदर कोई फूल हो ऐसा!

सदा रहे उनका आशीष, और बना रहे उनका ये प्यार,

ये है मेरा परिवार, और यही है मेरा संसार!!

नाम है जिनका राजकुमारी, हैं वे मेरी जननी,

सदैव ही रहती है जिनकी, एक कथनी और करनी!

कोटिक मुख से न हो वर्णन, इतना करती हैं वे प्यार,

ये है मेरा परिवार, और यही है मेरा संसार!!

चोट मुझे जब लगती है, तो दर्द उन्हें हो जाता,

शब्दों में जो बयां ना हो, ऐसी हैं मेरी माता!

जब भी मैं उनकी गोद में सोता, तो कहता हूं बस एक और बार,

ये है मेरा परिवार, और यही है मेरा संसार!!

सोनू जी से वियाह रचाया, है वो बड़ी बहना,

भावना है उसका नाम, अरे उसका तो क्या कहना!

गाय सा स्वभाव है जिसका, स्नेह का है भंडार,

ये है मेरा परिवार, और यही है मेरा संसार!

दूजी बहना नीलू है, हर्ष हैं जिसके पति,

सास-ससुर का आदर करती, है वो परम सती!

है करती वो सबसे ही, अनंत प्यार-दुलार,

ये है मेरा परिवार, और यही है मेरा संसार!!

रत्न मुझे समझती है, है ऐसी जूली बहना,

मन से चंचल कद में छोटी, कुछ ऐसा है उसका रहना!

मातृ कमी को पूरी करती, इतना करती है मुझको प्यार,

ये है मेरा परिवार, और यही है मेरा संसार!!

छोटा भाई है जो मेरा, अमित है उसका नाम,

भरत समान सेवा करे, जैसे मैं हूं राम!

है करता वो मुझपर, अनंत प्रेम की बौछार,

ये है मेरा परिवार, और यही है मेरा संसार!

अंत में अंकित पाठक से, है कुछ ऐसा कहता,

जैसा परिवार मुझे दिया, वैसा भगवन सबको देता!

मुझे जितना मिलता है, रब दे सबको प्यार,

ये है मेरा परिवार, और यही है मेरा संसार!!

Hindi kavita 2020

*श्री गणेशाय नमः*

प्रति वर्ष चतुर्थी को, होता तुम्हारा आगमन,

इस साल भी पुकारते हैं, आओ हे भगवन!

हर बार आप आते हैं, ढोल-नगाड़ों के साथ,

इस बार नहीं है, कोई भी ऐसी बात!!

सब देवों में सबसे पहले, आप हो पूजे जाते,

लम्बोदर गजानन नाम तुम्हारे, गणेश हो तुम कहाते!

मूषक की सवारी करते, साथ में ऋद्घि-सिद्धि,

जहां भी आप आ जाओ, होती सुख की वृद्धि!!

लड्डू रबड़ी और मोदक, आपको अति हैं भाते,

छल-कपट है जिनके मन में, वे न आपको पाते!

सच्चे मन से जब भी, भक्त है कोई बुलाता,

आपकी दया दृष्टि को, क्षण भर में पा जाता!!

मैं भी आपको बुलाता हूं, आओ हे गणेश,

है विनती ये आपसे, मिटादो सारे क्लेश!

देश-समाज सुरक्षित हो, बढ़े आपसी साथ,

यदि आपकी कृपा हो, और हो सिर आपका हाथ!!

आप सभी को गणेश चतुर्थी के अनंत शुभकमनाएं

-Ankit soni

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