Hindi Poem

Hindi Poem | Best Hindi poem 2020 | Hindi kavita 2020 |

Poem is an excellent tool to stimulate emotions. The inspiration of the poem makes the flow of emotions louder. Hindi Poem-हिंदी कविताएं express the substance of business of the universe in such a way that it start dancing in front of the eyes of matter of business. They appear idolized.

if anger, compassion, kindness, love etc. get out of the conscience of man then he cannot do anything. Poem throws our emotions and adds a new creature to our life. we are fascinated by the beauty of the universe. so here we are  presenting few Hindi Poem

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Hindi Poem-हिंदी कविताएं

सच की तलाश

ढूंढता हूँ सच को जाने

वह कहा पर खो गया है |

खुद ही छुप बैठा कहीं या

भीड़ में गुम हो गया है ||

सच के खोने की खबर

मैंने दिया अख़बार में

प्रिंट मिडिया न्यूज़ चैनल

 से भरे बाज़ार में

झूठ के दम पर दिखा सच का खुलासा हो गया है |

खुद ही छुप बैठा कहीं या

भीड़ में गुम हो गया है ||

सच है क्या और झूठ क्या है

अब कठिन यह समझ पाना

सत्य है संघर्ष करता

झूठ को संसार जाना

झूठ के आगोश में जा सच भी अब चुप हो गया है |

खुद ही छुप बैठा कहीं या

भीड़ में गुम हो गया है ||

झूठ पर दुनिया टिकी है

 सच के साथी हैं बहुत कम

झूठ पद पैसे का मालिक

सच से केवल मिल रहा गम

झूठ के इस ताप से शायद वो निर्बल हो गया है |

खुद ही छुप बैठा कहीं या

भीड़ में गुम हो गया है ||

_Sanjay Kumar Tripathi

बाज़ार

मिल सकती हर चीज़ यहाँ पर

पर सबके बाज़ार अलग हैं |

व्यापारी हर शख्स यहाँ हैं

पर सबके व्यापार अलग हैं ||

जिस्म खरीदो जान खरीदो

चाहो तो ईमान खरीदो,

गुण अवगुण की बात नहीं है

परिचय से सम्मान खरीदो,

मोल भाव करना तो जानो

हर चीजों के दाम अलग हैं|

मिल सकती हर चीज़ यहाँ पर

पर सबके बाज़ार अलग हैं |

कौन है हारा किसने जीता

बाज़ी किसके नाम रही,

हर जीत का खेल अनोखा

नहीं हो सका काम सही,

लाभ में सबका अंश बटा है

कहने को सरकार अलग है |

मिल सकती हर चीज़ यहाँ पर

पर सबके बाज़ार अलग हैं |

अन्धो के इस बड़े शहर में

आइना बेचने मैं निकला हूँ,

कौन सुनेगा किसे बताऊ

क्या दिखलाने मैं निकला हूँ,

शायद कुछ मजबूरी होगी

यूँ ही नहीं व्यवहार अलग हैं |

मिल सकती हर चीज़ यहाँ पर

पर सबके बाज़ार अलग हैं |

मैं भोला था एक अनाड़ी

अंतर समझ नहीं पाया,

सबके मुख पे देख मुखौटा

मन ही मन में घबराया,

रंगमंच क्या खूब सजा है

व्यक्ति वही किरदार अलग हैं|

मिल सकती हर चीज़ यहाँ पर

पर सबके बाज़ार अलग हैं |

व्यापारी हर शख्स यहाँ हैं

पर सबके व्यापार अलग हैं ||

_Sanjay Kumar Tripathi

Hindi poem-हिंदी कविताएं

 

 

 

Hindi Poem by Ankit

ये बात है हिंदुस्तान की

संस्कृति का गुरु है जो, परम्पराओं का निवास है,

भाषाओं का भंडार जहां है, मान्यताओं का भी वास है!

भू-भाग में विशाल है जो, अखण्ड भारत के विज्ञान की,

इस बात को तुम गौर से सुनलो, ये बात है हिंदुस्तान की!!

धातु के भंडार जहां है, पूरब से लेकर पश्चिम तक,

सोना ही सोना जहां है, उत्तर से लेकर दक्षिण तक!

सोने की चिड़िया कहते हैं जिसे, उस सोने की खद्यान की,

इस बात को तुम गौर से सुनलो, ये बात है हिंदुस्तान की!!

वास्कोडिगामा भारत आया, जब चौदह सौ के काल में,

किसी को क्या पता था, फंसते जा रहे हैं हम किसी के जाल में!

व्यापारी बनकर वे आए, और हम से जान-पहचान की,

इस बात को तुम गौर से सुन लो यह बात है हिंदुस्तान की!!

आजादी को पाने के लिए, हुए कई संग्राम,

दिल्ली थी बंगाल था, और भी थे कई ग्राम!

एक-एक कर परिचय दूंगा, दूंगा जानकारी उनके नाम की,

इस बात को तुम गौर से सुनलो, ये बात है हिंदुस्तान की!!

अपने बच्चे को पीठ पर लादकर, रण में लड़ने आई थी,

झांसी की रानी वह थी, लक्ष्मी बाई कहाई थी!

जिसे कभी भूल नहीं सकते, उस स्त्री के बलिदान की,

इस बात को तुम गौर से सुनलो, ये बात है हिंदुस्तान की!!

निस्वार्थ मार गिराए शत्रु को, तात्या ही वे वीर थे,

100 किलो का कवच था जिनका, प्रताप वह महावीर थे!

याद दिलाए नानी अंग्रेजों को, उन वीरों की शान की,

इस बात को तुम गौर से सुनलो, ये बात है हिंदुस्तान की!!

वह समय भी आ गया, जब होने वाला था परिवर्तन,

काल वह कोई और नहीं, था वह अठारह सौ सत्तावन!

कुर्बान हुए संग्राम में जो, उन योद्धाओं की जान की,

इस बात को तुम गौर से सुनलो, ये बात है हिंदुस्तान की!!

वंदे मातरम कहते हुए, फांसी पर चढ़ना हुए शुरू,

महान हैं वे तीनों वीर, भगत सिंह सुखदेव राजगुरु!

व्यर्थ न जाए उनकी जान, इसलिए उनके कुर्बान की,

इस बात को तुम गौर से सुनलो, ये बात है हिंदुस्तान की!!

करो या मरो का नारा दिया, बैरिस्टर बनकर गांधी आए,

असहयोग नमक भारत छोड़ो, जैसे आंदोलन साथ लाए!

बापू के उस नाम की, सत्य अहिंसा और ज्ञान की,

इस बात को तुम गौर से सुनलो, ये बात है हिंदुस्तान की!!

अंततः वह समय भी आया, जब हुआ देश आजाद,

चौदह-पंद्रह की वह रात थी, जब मिली गुलामी से निजात!

गांव भी बंट गए शहर भी बंट गए, जब हुई बात पाकिस्तान की,

इस बात को तुम गौर से सुनलो, ये बात है हिंदुस्तान की!!

जो कभी एक थे, अब हो गए वे दो देश,

तनाव बढ़ा शत्रुता बढ़ी, बढ़ गया आपसी क्लेश!

चीन से मित्रता बढ़ाता, उस बैरी पाकिस्तान की,

इस बात को तुम गौर से सुनलो, ये बात है हिंदुस्तान की!!

पुलवामा के चालीस शहीद, जिन पर आया था रोना,

चुनौतियों से घिरा ही है देश, और आ गया कोरोना!!

इसी काल में शहीद हुए, लैक के 20 जवान की,

इस बात को तुम गौर से सुनलो, ये बात है हिंदुस्तान की!!

ना ही मैं कोई लेखक हूं, और ना ही कोई कवि,

फिर भी लिखना शौक है, यह है बात बिल्कुल सही!

रचना में जो डाली है, अंकित की उस जान की,

इस बात को तुम गौर से सुनलो, ये बात है हिंदुस्तान की!!

आपने मुझे सुना, इसके लिए है आभार,

कैसी है मेरी कृति, कृपया करें विचार!

सदैव से था आगे भी होगा, उस भारत महान की,

इस बात को तुम गौर से सुनलो, ये बात है हिंदुस्तानी की!!

_Ankit soni

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 Hindi Poem by Amit Rai And Geeta Saun

पिता

जब मैं आया इस ज़मी पर, उसकी खुशी का कोई ठिकाना न था,

गोद मे उठा कर उसने मुझको इतना चाहा,  जितना कभी किसी को चाहा न था ।

तभी खा ली थी कसम उसने, की खुद को तोड़ कर वो मझे बना देगा,

आएगी कोई मुसीबत मुझ पर तो, वो मुझको बचा लेगा।

देने के लिए मुझे वो हर खुशी, उसने अपना घर छोड़ दिया,

अपनी बीवी छोड़ दी, अपना बच्चा छोड़ दिया।

मै उस समय उसके त्याग से अंजान था,

मेरे लिए तो बस मेरी माँ का प्यार ही महान था ।

जब बहोत दिनों बाद वो आते थे घर पर,

मुझको देख कर उनकी तकलीफ़े दूर हो जाती थीं,

मेरे लिए कुछ भी कर गुजरने की उनकी इच्छा शक्ति फिर से मजबूत हो जाती थी,

उनको देख कर मैं भी बहुत खुश हो लेता था,

 कहाँ थे? इतने दिन बाद आये हो, रूठ कर कह देता था।

फिर कुछ दिनों बाद, उनके रुकने के वो चंद लम्हे फिर से बीत जाते थे,

अपनी माँ को परेशान मत करना,

वो बस इतना कह कर मुझसे, दुबारा चले जाते थे।

की मेरी फ़िजूल की जरूरतों को पूरा करने के लिए,

उसने अपने काम का वक़्त बढा लिया,

थोड़े और पैसे बचे मेरे लिए, इसलिए उसने अपनी जरूरतों को घटा लिया,

इन जिम्मेदारियों के बोझ ने, उन्हें बूढ़ा बना दिया,

पूरी जिंदगी मुझे तक़लीफ़ न होने देने का वादा, उन्होंने बखूबी निभा लिया,

मैं उनके त्याग को अब समझ चुका हूँ, मैं कहना चाहता हूँ उनसे अब की,

हो चुका बस करो, अब आराम करो, अपने हिस्से की बची मेहनत अब मेरे नाम करो,

जो वादा तुमने किया मुझसे एक वक्त कभी, वो आज मैं तुमसे करता हूँ,

तुम्हारे बुढापे को अपना बचपन बना दूंगा, तुम परेशान न हो पापा….

मैं अब सब संभाल लूंगा ।|

_Amit Rai

Hindi Poem

 

 

 

 

रख हौसला

 रख हौसला ऐ बन्दे
वो मंजर भी आएगा

प्यासे के पास चल कर
एक रोज समंदर भी आएगा

करते रहना कोशिश तू
न मेंहनत से जी चुराना

बढ़ते रहना राहे मंजील पर
लेकिन थक के बैठ न जाना

बस याद इतना रखना तू
ऐ मंजील के मुसाफिर

एक दौर ये भी आएगा
मंजील भी मिलेगी मेरे दोस्त, और जीत का मजा भी आ जायेगा
बस तू रख हौसला ||

_Geeta Saun

ये जो कुछ आज है कल तो नहीं है
ये शाम-ए-ग़म मुसलसल तो नहीं है

मैं अक्सर रास्तों पर सोचता हूँ
ये बस्ती कोई जंगल तो नहीं है

यक़ीनन तुम में कोई बात होगी
ये दुनिया यूँही पागल तो नहीं है

मैं लम्हा लम्हा मरता जा रहा हूँ 

मिरा घर मेरा मक़्तल तो नहीं है

किसी पर छा गया बरसा किसी पर
वो इक आवारा बादल तो नहीं है ||

_Taaj Bhopali

अगर आपको ये सारी कविताए अच्छी लगी तो कमेंट करे जिससे हम ज्यादा से ज्यादा Hindi Poem-हिंदी कविताएं आप तक पंहुचा सके, धन्यवाद।।

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12 thoughts on “Hindi Poem | Best Hindi poem 2020 | Hindi kavita 2020 |”

  1. 1
    Sanjeev Kumar Jaiswal

    इस कविता के अहसासों को लफ़्ज़ों में बयां नही कर सकता।

  2. 1
    Sanjeev Kumar Jaiswal

    इस कविता के अहसासों को लफ़्ज़ों में बयां नही कर सकता।

  3. 1

    सच में इस संसार में पिता तुल्य कोई भी नहीं है।

  4. 1

    सच की तलाश और बाजार शीर्षक की कविता पढ़कर बहुत आनंद आया। सरल शब्दों में बड़ी बात कह गए संजय जी। बहुत बहुत बधाई और हार्दिक शुभकामनाएं।

    उत्कर्ष का उत्साह देखकर खुशी हुई। एक सलाह – एक ही पोस्ट में अनेक कविताएं डालना ठीक नहीं। प्रत्येक कविता एक अलग पोस्ट की हकदार है। इससे पढ़ने वालों को भी सहूलियत होगी और टिप्पणी करना भी सुविधाजनक होगा।

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